व्रत, त्योहार और गीता: भाई दूज से कार्तिक मास तक
भाई दूज, गोवर्धन पूजा, देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा, देव दीपावली और गीता जयंती की विधि, नियम और मान्यताएँ।
इस सेक्शन की सामग्री पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी है। परिणाम की निश्चितता नहीं; स्वास्थ्य, संपत्ति या कानूनी मामलों में विशेषज्ञ से सलाह लें।
गीता जयंती और गीता पाठ 4 लेख
- गीता जयंती पर कौन-से अध्याय पढ़ें? पाठ विधि और श्लोकपरंपरा में गीता जयंती पर पूरी गीता पढ़ना श्रेष्ठ माना जाता है, पर समय कम हो तो दूसरा (सांख्य योग), बारहवाँ (भक्ति योग)…
- गीता का 15वाँ अध्याय: पुरुषोत्तम योग पाठ विधि और अर्थगीता का पंद्रहवाँ अध्याय पुरुषोत्तम योग कहलाता है। इसमें केवल बीस श्लोक हैं, जो संसार को अश्वत्थ वृक्ष के रूप में समझाकर क्षर…
- गीता 15.14 श्लोक से भोजन से पहले प्रार्थना का नियमगीता के पंद्रहवें अध्याय का चौदहवाँ श्लोक 'अहं वैश्वानरो भूत्वा' कहता है कि ईश्वर जठराग्नि बनकर प्राणियों के शरीर में चार प्रकार…
- ब्रह्मार्पणम् 4.24 और 15.14 भोजन मंत्र की पूरी विधिगीता 4.24 का श्लोक 'ब्रह्मार्पणं ब्रह्म हविर्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्' भोजन को यज्ञ की तरह अर्पण करने का भाव देता है, और 15.14…
भाई दूज और गोवर्धन पूजा 9 लेख
- गोवर्धन पूजा और भाई दूज पर मुख्य द्वार के नियम, सजावट व उपायपरंपरा में माना जाता है कि गोवर्धन पूजा (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) और भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) पर घर का मुख्य द्वार…
- भाई दूज पर यम दीपक कैसे जलाएँ: विधि, मंत्र और दिशापरंपरा में माना जाता है कि यम द्वितीया यानी भाई दूज की संध्या पर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके चौमुखा या एक दीपक रखकर…
- भाई दूज पर तिलक की दिशा, थाली की सामग्री और पूरी विधिपरंपरा में माना जाता है कि भाई दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) पर भाई को चौक पर बैठाकर, उसका मुख उत्तर या पूर्व की ओर रखकर…
- भाई दूज पर बहन के हाथ का भोजन: नियम, मान्यता और कथापरंपरा में माना जाता है कि भाई दूज के दिन भाई का बहन के घर जाकर उसके हाथ का बना भोजन करना स्नेह और कल्याण का प्रतीक है। कथा में…
- भाई दूज पर बहन को क्या उपहार दें और क्या टालें?परंपरा में माना जाता है कि भाई दूज पर बहन को वस्त्र, मिठाई, फल, मंगल-सामग्री, सोने-चाँदी का छोटा आभूषण या शगुन की राशि देना शुभ…
- बहन दूर हो तो भाई दूज पर तिलक कैसे करें? वैकल्पिक विधिपरंपरा में माना जाता है कि भाई दूज का मूल भाव प्रेम और कृतज्ञता है, इसलिए बहन दूर हो तो भाई अपने घर तिलक की वैकल्पिक विधि कर…
- भाई दूज पर यम-यमुना स्तोत्र और संकल्प की सही विधिपरंपरा में माना जाता है कि भाई दूज (यम द्वितीया) पर यमराज और बहन यमुना का स्मरण करने से भाई की लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना…
- भाई दूज पर यमुना स्नान का महत्व और घर पर स्नान विधिपरंपरा में भाई दूज (यम द्वितीया) पर यमुना में स्नान को पुण्यदायी माना जाता है, क्योंकि यमुना को यमराज की बहन कहा गया है। जो लोग…
- भाई दूज की पौराणिक कथा और मथुरा के विश्राम घाट का महत्वभाई दूज की पौराणिक कथा यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ी है, जिसमें यमराज कार्तिक शुक्ल द्वितीया को बहन के घर जाते हैं और वरदान…
कार्तिक मास के व्रत 14 लेख
- देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह: विधि, नियम और महत्वदेवउठनी एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी है, जिस दिन परंपरा में माना जाता है कि भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते…
- देवउठनी एकादशी का पारण कब और कैसे करें? द्वादशी के नियमएकादशी व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में, सूर्योदय के बाद और पंचांग में बताए पारण-समय के भीतर किया जाता है। परंपरा के…
- कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान और दीपदान: देव दीपावली विधिकार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली कहा जाता है। परंपरा में माना जाता है कि इस दिन देवता दीप जलाकर उत्सव मनाते हैं, इसलिए सूर्योदय…
- कार्तिक पूर्णिमा पर 365 बत्तियों का दीपक: विधि और नियमकुछ परंपराओं में कार्तिक मास में रोज़ एक बत्ती का दीपक जलाया जाता है और पूर्णिमा पर पूरे वर्ष की संख्या के प्रतीक रूप में 365…
- भीष्म पंचक व्रत: पाँच दिन के नियम, पूजा और महत्वभीष्म पंचक व्रत कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक पाँच दिन चलने वाला व्रत है। परंपरा में माना जाता है कि इसका संबंध महाभारत के…
- वैकुंठ चतुर्दशी: हरि-हर मिलन पूजन की विधि और कथावैकुंठ चतुर्दशी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को पड़ती है, जब परंपरा में भगवान विष्णु और शिव की एक साथ पूजा, यानी हरि-हर मिलन, की जाती…
- वैकुंठ चतुर्दशी पर 14 दीये कहाँ और किस दिशा में रखें?परंपरा में माना जाता है कि कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी (वैकुंठ चतुर्दशी) पर 14 दीये घर के देवस्थान, तुलसी, मुख्य द्वार, रसोई…
- त्रिपुरारी पूर्णिमा पर महादीपदान के नियम और सही विधिपरंपरा में माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा को शिव जी ने त्रिपुरासुर के तीनों पुरों का अंत किया था, इसलिए इसे त्रिपुरारी…
- काशी की देव दीपावली: 84 घाटों पर दीपदान का रहस्यकाशी में देव दीपावली कार्तिक पूर्णिमा की संध्या को गंगा के घाटों पर दीप जलाकर मनाई जाती है। परंपरा में माना जाता है कि इस रात…
- कार्तिक मास का आकाशदीप: बांस पर दीया क्यों टांगते हैं?आकाशदीप कार्तिक मास में ऊँचे बांस या खंभे पर टोकरी में दीया टांगने की परंपरा है। मान्यता है कि यह दीप पितरों और भटके हुए…
- कार्तिक मास के व्रत का उद्यापन कैसे करें? विधि और दानकार्तिक मास का उद्यापन मास भर लिए गए स्नान, दीपदान, तुलसी-सेवा या संयम के नियमों के समापन की पूजा है। परंपरा में यह कार्तिक…
- मार्गशीर्ष (अगहन) मास के नियम और धार्मिक महत्वमार्गशीर्ष (अगहन) कार्तिक के बाद आने वाला महीना है, जिसे परंपरा में श्रीकृष्ण और विष्णु-भक्ति का विशेष मास माना जाता है। इसमें…
- अगहन गुरुवार व्रत: महालक्ष्मी पूजा, मांडना और नियममार्गशीर्ष (अगहन) मास के गुरुवार व्रत में परंपरा के अनुसार महीने के हर गुरुवार को महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। घर के आँगन या…
- उत्पन्ना और मोक्षदा एकादशी: नियम, कथा और पारणमार्गशीर्ष मास की दो एकादशियाँ परंपरा में प्रमुख हैं: कृष्ण पक्ष की उत्पन्ना एकादशी, जो एकादशी देवी के प्राकट्य की कथा से जुड़ी…